- फिल्म का नाम: दो शिकारी (Do Shikari)
- मुख्य कलाकार: रेखा और विश्वजीत चैटर्जी
- विवाद का विषय: फिल्म का एक अंतरंग किसिंग सीन
- हालिया बयान: अभिनेता विश्वजीत चैटर्जी ने इसे आधुनिक फिल्मों के मुकाबले महत्वहीन बताया है
- सिनेमा का बदलाव: सत्तर के दशक की तुलना में आज के सिनेमा और ओटीटी में बोल्ड सीन्स बेहद आम हैं
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में और सीन्स रहे हैं जो अपनी रिलीज के समय या बाद में बड़े विवादों का केंद्र बने। ऐसा ही एक चर्चित किस्सा अभिनेत्री रेखा और अभिनेता विश्वजीत चैटर्जी की फिल्म ‘दो शिकारी’ (Do Shikari) का किसिंग सीन है। सत्तर के दशक की इस फिल्म में फिल्माया गया यह अंतरंग दृश्य उस दौर के हिसाब से काफी बोल्ड माना गया था। हाल ही में अभिनेता विश्वजीत चैटर्जी ने इस पुराने विवाद पर खुलकर बात की है और वर्तमान समय के सिनेमा से इसकी तुलना की है। आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद की असल कहानी क्या थी और इसे लेकर क्या कुछ सामने आया है।
भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर में ऑन-स्क्रीन रोमांस और अंतरंग दृश्यों को लेकर दर्शकों और सेंसर बोर्ड की प्रतिक्रियाएं आज के दौर से काफी अलग हुआ करती थीं। सत्तर के दशक में जब फिल्मों में थोड़ा भी बोल्ड कंटेंट दिखाया जाता था, तो वह तुरंत हेडलाइंस बन जाता था। रेखा और विश्वजीत चैटर्जी की फिल्म ‘दो शिकारी’ भी इसी श्रेणी में आती है। इस फिल्म का एक किसिंग सीन उस दौर में अखबारों और पत्रिकाओं की सुर्खियों में छाया रहा था। विस्तृत विवरण के अनुसार, इस सीन को लेकर लंबे समय तक चर्चा होती रही कि यह किस परिस्थिति में शूट किया गया था और इसे लेकर कलाकारों के बीच क्या समीकरण थे।
हाल ही में, इस पुराने विवाद को लेकर अभिनेता विश्वजीत चैटर्जी ने एक इंटरव्यू में अपनी चुप्पी तोड़ी है। उनका कहना है कि आज के आधुनिक और खुले दौर की फिल्मों में जिस तरह के अंतरंग और बेडरूम सीन्स दिखाए जाते हैं, उनके सामने उस दौर का वह किसिंग सीन बहुत मामूली लगता है। इस संबंध में हालिया रिपोर्ट बताती हैं कि विश्वजीत चैटर्जी ने एनिमल जैसी आधुनिक फिल्मों के बेडरूम सीन्स का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में उस पुराने विवाद का अब कोई विशेष अर्थ नहीं रह गया है क्योंकि सिनेमा और दर्शकों की सोच दोनों में बहुत बड़ा बदलाव आ चुका है।
सत्तर के दशक में रेखा ने बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। इस दौर में उन्हें कई बार ऐसे किरदारों और दृश्यों का सामना करना पड़ा जो उनकी छवि के विपरीत थे। ‘दो शिकारी’ फिल्म में विश्वजीत चैटर्जी के साथ उनका वह इंटीमेट सीन उस समय की पत्रिकाओं में सनसनी की तरह छापा गया था। हालांकि, समय के साथ न सिर्फ भारतीय सिनेमा का नजरिया बदला है, बल्कि इन कलाकारों ने अपने करियर में उससे कहीं आगे बढ़कर अपनी एक अलग और सम्मानित पहचान बनाई है।
जब इस तरह के पुराने विवादों को आज के परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है, तो यह समझना जरूरी है कि तब और अब के दौर में जमीन-आसमान का फर्क है। नब्बे के दशक के बाद और अब आधुनिक ओटीटी युग में अंतरंग दृश्यों को दिखाना बेहद आम हो चुका है। ऐसे में, सत्तर के दशक की फिल्मों के उन सीन्स को आज के मापदंडों पर तौलना पुराना और बेमानी हो जाता है। खुद विश्वजीत चैटर्जी ने भी यही रेखांकित किया है कि बदलते वक्त के साथ दर्शकों की संवेदनशीलता भी बदल चुकी है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि बॉलीवुड के पुराने किस्से और विवाद आज भी दर्शकों के बीच जिज्ञासा का विषय बने रहते हैं। भले ही अभिनेता ने इसे अब अर्थहीन बताया हो, लेकिन फिल्म इतिहास के पन्नों में ‘दो शिकारी’ का वह सीन हमेशा एक मील का पत्थर या एक विवादास्पद अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा। रेखा और विश्वजीत दोनों ही अपने समय के बेहद लोकप्रिय कलाकार रहे हैं, और उनके करियर के इन अनछुए पहलुओं पर आज भी लोग उतनी ही दिलचस्पी से बात करते हैं।
विश्वजीत चैटर्जी का हालिया बयान और आधुनिक सिनेमा की तुलना
हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान, दिग्गज अभिनेता विश्वजीत चैटर्जी ने रेखा के साथ अपनी फिल्म ‘दो शिकारी’ के उस चर्चित किसिंग सीन को याद किया और स्पष्ट किया कि आज के समय में उस पुराने विवाद का कोई औचित्य नहीं है। इस संबंध में हालिया रिपोर्ट बताती हैं कि अभिनेता ने संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ जैसी आधुनिक फिल्मों के बेडरूम दृश्यों का हवाला देते हुए वर्तमान दौर की फिल्मों में दिखाई जाने वाली बोल्डनेस की तुलना उस पुराने दौर से की। उनका मानना है कि समय के साथ दर्शकों और फिल्म निर्माताओं की सोच में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

सत्तर के दशक का दौर और सेंसर बोर्ड की सीमाएं
सत्तर के दशक के भारतीय सिनेमा में सेंसर बोर्ड के नियम काफी सख्त हुआ करते थे और ऑन-SCREEN इंटीमेसी को लेकर सामाजिक नैतिकताओं का बहुत अधिक ध्यान रखा जाता था। ऐसे माहौल में जब ‘दो शिकारी’ जैसी फिल्मों में कोई बोल्ड या किसिंग सीन शूट किया जाता था, तो वह तुरंत सनसनी बन जाता था। विस्तृत विवरण के अनुसार, इस प्रकार के दृश्य न केवल फिल्म के प्रचार का हिस्सा बन जाते थे, बल्कि कई बार कलाकारों के व्यक्तिगत जीवन और करियर पर भी गहरा प्रभाव डालते थे, जिससे दर्शकों की उत्सुकता कई गुना बढ़ जाती थी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रेखा और विश्वजीत चैटर्जी की किस फिल्म में किसिंग सीन था?
रेखा और विश्वजीत चैटर्जी की फिल्म ‘दो शिकारी’ (Do Shikari) में एक चर्चित किसिंग सीन था, जो उस समय काफी विवादों में रहा था।
यह विवाद हाल ही में चर्चा में क्यों आया?
हाल ही में अभिनेता विश्वजीत चैटर्जी ने एक इंटरव्यू में इस पुराने किसिंग सीन और विवाद पर खुलकर बात की और इसे आज के दौर की फिल्मों के मुकाबले नगण्य बताया।
विश्वजीत चैटर्जी ने हालिया बयान में किसकी तुलना की है?
उन्होंने अपने पुराने किसिंग सीन की तुलना हालिया दौर की फिल्मों जैसे ‘एनिमल’ के बेडरूम सीन्स से की है।
सत्तर के दशक में इस सीन को लेकर विवाद क्यों हुआ था?
सत्तर के दशक के सिनेमा में इस तरह के बोल्ड और अंतरंग दृश्य बहुत कम देखने को मिलते थे, इसलिए इस सीन ने मीडिया और दर्शकों का ध्यान खींचा था।
क्या आज के दौर में इस विवाद का कोई मतलब है?
अभिनेता विश्वजीत चैटर्जी के अनुसार, आज के आधुनिक सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के खुलेपन को देखते हुए इस पुराने विवाद का अब कोई विशेष अर्थ नहीं है।
